स्ट्रोक और कोरोना वायरस ( कोविड -१९)

कोविड महामारी से स्ट्रोक पर भी असर पड़ा है। इसे दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:

एक स्ट्रोक मरीज़ को कोविड होने का खतरा और
एक कोविड मरीज़ को स्ट्रोक होने का खतरा

स्ट्रोक मरीज़ को कोविड होने का खतरा

स्ट्रोक मरीज़ों को आमतौर पर किसी भी संक्रमण को पकड़ने का अधिक जोखिम होता है। उनमें से कई को पहले से ही बहुत से रोग होते है (जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, श्वसन रोग) या वो बुजुर्ग होते हैं।

इसलिए स्ट्रोक पीड़ितों को अतिरिक्त सावधानी बरतने और सभी आवश्यक नियम का पालन करने की आवश्यकता है जैसे कि घर में लाए जाने वाले सामान को साफ करना, जहां आवश्यक हो वहां मास्क लगाना और जोखिम को कम करने के लिए जितना संभव हो उतना अलग रहना।

भारत में कोविड टीकाकरण के दुसरे चरण में ६० वर्ष से ऊपर के व्यक्ति या फिर ४५-६० वर्ष आयु के व्यक्ति जिनको कुछ और बीमारियां जैसे डायबिटीज, उच्च रक्तचाप जैसे हों , को टीका लगाने कि व्यवस्था करी गयी है। अधिकांश स्ट्रोक मरीज़ इनमें से किसी श्रेणी में आते हैं। सो उनको टीका लगवाना चाहिए।

कोविड मरीज़ को स्ट्रोक होने का खतरा

कई अध्ययन एक कोविड रोगी को स्ट्रोक होने के अधिक जोखिम की ओर इशारा करते हैं। उदाहरण के लिए 21 मार्च को साइंस डेली की इस रिपोर्ट ने स्पष्ट रूप से इसकी ओर इशारा किया। भारत में भी अक्टूबर 2020 में प्रकाशित इस लेख ने भी इस पहलू को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। यह लेख कोविड प्रभावितों के लिए स्ट्रोक के जोखिम के बारे में विस्तार से बताता है।

इस उच्च जोखिम के मुख्य कारण हैं :

  • कोविड संक्रमण रक्त के थक्के बनने की प्रवृत्ति को बढ़ाता है। अगर यह थक्के मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों में बनें तो ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ाता है।
  • यह थक्के जमने की प्रवृत्ति कोविड मुक्त होने के बाद कई हफ्तों तक जारी रहती है। इसलिए एक कोविड संक्रमित रोगी के लिए स्ट्रोक का जोखिम कोविड मुक्त होने के बाद भी कई हफ्तों तक बना रहता है।
  • कई कोविड रोगियों में अन्य जोखिम कारक होते हैं जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह आदि।
  • स्वयं कोविड की जटिलताएं – जैसे हृदय, फेफड़े, गुर्दे आदि जैसे कुछ अंगों के बिगड़ने से भी स्ट्रोक का अधिक खतरा हो सकता है।

आम तौर पर कोविड मुक्त होने के बाद अब लगभग एक महीने तक कोविड रोगियों को खून पतले की सलाह दी जाती है।

इसलिए एक कोविड प्रभावित व्यक्ति को स्ट्रोक से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है, भले ही वह कोविद मुक्त हो गया हो। बेशक इसके लिए यह और भी महत्वपूर्ण है कि स्ट्रोक होने के लक्षणों की तुरंत पहचान की जाए और उसपे कार्रवाई की जाए।

स्ट्रोक के लक्षणों को जानने और उस वक्त जल्दी सही उपचार की महत्ता को समझने के लिए आप इस लेख को पढ़ सकते हैं।